मंगलवार, 1 जून 2021

दर्द

 जा रहे हो तो जाओ मगर याद रखना,

      तुम्हें खोकर जीना न आसान होगा।

गुजरने लगा दर्द अगर हद से ज्यादा,

   


फ़क़त चार दिन का वो मेहमान होगा।

बुधवार, 12 मई 2021

खिलौना


 कब तक बच तू पायेगा तू तो माटी का  खिलौना है

दो गज धरती मन भर लकड़ी,आखिरी तेरा बिछौना है

                                  -विनय राय

शनिवार, 1 मई 2021

बफ़ा


 बेवफाओं की बस्ती में ,वफ़ा न लाज़मी रहा

कल तलक था आदमी,अब कहाँ वो आदमी रहा।

                                विनय राय

शनिवार, 17 अप्रैल 2021

माँ


 जब भी तारों को देखूं माँ, याद तुम्हारी आती है।

तू क्या जाने ये दुनिया माँ, कितना मुझे रुलाती है।